milap singh

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Saturday, 29 November 2014

Sharaab pite hai


शराब पीते हैं और झूमते हैं गाते हैं
इस तरह हम अपने गम छुपाते हैं
कोई पूछे जो सबब हमसे पीने का
बेबफा को याद करते हैं मुस्कुराते हैं

    ------ मिलाप सिंह भरमौरी

Good morning shayari


घोंसलों से निकल के पंछियों ने
छेडा है सुंदर राग

सुबह हो गई है जग
उठ बिस्तर से तू अब जाग

बुला रही है कर्म भूमि तुझे
कर सुर्यवंदना से मन विस्तार

कदम बढा तू है भारत का वासी
कर ले पूर्ण अपने तू सब काज

----- मिलाप सिंह भरमौरी