Milap Singh Bharmouri
Tuesday, 7 January 2014
Monday, 6 January 2014
Sunday, 5 January 2014
Thursday, 21 November 2013
बापू आशा राम अमर हो गये है
बापू आशा राम
अमर हो गये है
मुझको तो कुछ ऐसा लगता है
पर्याय बन चूका है उसका नाम
आते जाते हर कोई उसकी बातें करता है
उसके बारे जो आज मैंने सुना है
आपको भी बतलाता हूँ
उसकी महिमा को
व्याख्या सहित सुनाता हूँ
जब आज दोपहर मै
कलोनी से गुजर रहा था
तो चार पांच औरतों में
कुछ खुसर पुसर चल रहा था
जब कान के पर्दों को मैंने
थोडा उधर झुकाया
तो उधर से मैंने यह
रहस्य पाया
इस रेल की नौकरी की टैंशन ने
हमारे मर्दों को
पच्चास की उम्र में ही फेल कर दिया है
और उधर देखो
बापू आशा राम
पच्चहतर की उम्र में भी पास हो गया है
उसी वक्त हाल्ट से
लोकल ने हार्न बजाया
मैंने जल्दी जल्दी
स्टेशन की ओर कदम बढ़ाया
जब गाड़ी में बैठा तो
वहाँ पर भी कुछ
कॉलेज के लड़के बैठे थे
आपस में वो तरह तरह की
बातें कर रहे थे
उनमे से एक को बार बार
फोन आ रहे थे
शायद गर्ल फ्रेंड का होगा
उनमे से एक बोला
पहले हम तो सोचते थे तू भी
हमारी तरह अकेला है
पर आज फोन से लग रहा है
तू तो असली बापू आशा राम का चेला है
फिर नाईट ड्यूटी में भी मैंने
कुछ शव्द सुने थे
रिटायरमेंट पर बैठे
कुछ इम्प्लॉई इकठ्ठे काम कर रहे थे
मजाक- मजाक में एक बोला
अरे इतनी रत हो गई
तू अभी घर नही गया
उसने भी उत्तर में कहा
अरे भाई ! अब पहले वाला जोश नही रहा
दूसरा झट से बोला
क्या बात करता है भाई
बापू आशा राम को देखो
उसका चेला बन जा सांई
इतनी बातें सुनते ही
मेरे अंतर्मन ने कहा
मिलाप यह बापू आशा राम
लोकोक्ति है या मुहावरा
...........मिलाप सिंह भरमौरी
अमर हो गये है
मुझको तो कुछ ऐसा लगता है
पर्याय बन चूका है उसका नाम
आते जाते हर कोई उसकी बातें करता है
उसके बारे जो आज मैंने सुना है
आपको भी बतलाता हूँ
उसकी महिमा को
व्याख्या सहित सुनाता हूँ
जब आज दोपहर मै
कलोनी से गुजर रहा था
तो चार पांच औरतों में
कुछ खुसर पुसर चल रहा था
जब कान के पर्दों को मैंने
थोडा उधर झुकाया
तो उधर से मैंने यह
रहस्य पाया
इस रेल की नौकरी की टैंशन ने
हमारे मर्दों को
पच्चास की उम्र में ही फेल कर दिया है
और उधर देखो
बापू आशा राम
पच्चहतर की उम्र में भी पास हो गया है
उसी वक्त हाल्ट से
लोकल ने हार्न बजाया
मैंने जल्दी जल्दी
स्टेशन की ओर कदम बढ़ाया
जब गाड़ी में बैठा तो
वहाँ पर भी कुछ
कॉलेज के लड़के बैठे थे
आपस में वो तरह तरह की
बातें कर रहे थे
उनमे से एक को बार बार
फोन आ रहे थे
शायद गर्ल फ्रेंड का होगा
उनमे से एक बोला
पहले हम तो सोचते थे तू भी
हमारी तरह अकेला है
पर आज फोन से लग रहा है
तू तो असली बापू आशा राम का चेला है
फिर नाईट ड्यूटी में भी मैंने
कुछ शव्द सुने थे
रिटायरमेंट पर बैठे
कुछ इम्प्लॉई इकठ्ठे काम कर रहे थे
मजाक- मजाक में एक बोला
अरे इतनी रत हो गई
तू अभी घर नही गया
उसने भी उत्तर में कहा
अरे भाई ! अब पहले वाला जोश नही रहा
दूसरा झट से बोला
क्या बात करता है भाई
बापू आशा राम को देखो
उसका चेला बन जा सांई
इतनी बातें सुनते ही
मेरे अंतर्मन ने कहा
मिलाप यह बापू आशा राम
लोकोक्ति है या मुहावरा
...........मिलाप सिंह भरमौरी
Monday, 18 November 2013
एक बच्चे का नियम
काश! इक सरकार ऐसी बने
जो वास्तव में हितकारी हो
एक कठोर कानून बनाकर रोके जो
बढ़ती जनसंख्या की बीमारी को
जो सब धर्मो पर लागु हो
जो सब वर्गो पर लागु हो
एक जीवित बच्चे का नियम
जिसे मानने पर हर कोई बाध्य हो
जिसे तोड़ने पर जुर्माना हो
और दोषी को कठोर हर्जाना हो
जिसमे धारा और उप धारा हो
जिस से बचने का न कोई बहाना हो
इसके लाभ -हानियों की सूची बने
चुनाव के पोस्टर की तरह घर- घर में बंटे
हर धर्म मजहव की शादी से पहले
हर दुल्हे -दुल्हन को ये मिले
इसमें दंड का कठोर प्रवधान हो
जिसे सोच के हर कोई सावधान हो
और मानने वाले को सुविधाएँ भी मिले
इसलिए खुद- व् -खुद मानने को राजी हर इंसान हो
.......................मिलाप सिंह भरमौरी
कविता का अगला हिस्सा अगली पोस्ट में भेजूंगा ..
जो वास्तव में हितकारी हो
एक कठोर कानून बनाकर रोके जो
बढ़ती जनसंख्या की बीमारी को
जो सब धर्मो पर लागु हो
जो सब वर्गो पर लागु हो
एक जीवित बच्चे का नियम
जिसे मानने पर हर कोई बाध्य हो
जिसे तोड़ने पर जुर्माना हो
और दोषी को कठोर हर्जाना हो
जिसमे धारा और उप धारा हो
जिस से बचने का न कोई बहाना हो
इसके लाभ -हानियों की सूची बने
चुनाव के पोस्टर की तरह घर- घर में बंटे
हर धर्म मजहव की शादी से पहले
हर दुल्हे -दुल्हन को ये मिले
इसमें दंड का कठोर प्रवधान हो
जिसे सोच के हर कोई सावधान हो
और मानने वाले को सुविधाएँ भी मिले
इसलिए खुद- व् -खुद मानने को राजी हर इंसान हो
.......................मिलाप सिंह भरमौरी
कविता का अगला हिस्सा अगली पोस्ट में भेजूंगा ..
Wednesday, 6 November 2013
इस तरह राजनीती से
इस तरह राजनीती से
हम शिकार हुए थे
पिछले महीने छुट्टी पर
जब हम अपने गांव गये थे
जाते- जाते अपने कल्चर से कुछ
ज्यादा ही प्यार आया था
अपने कबीले की टोपी
पहन के जायेंगे
मन में विचार आया था
दुकान पर जाके बढ़िया- सी
मैंने टोपी खरीदी थी
और बढ़े चाव के साथ
सिर पर पहनी थी
गांव में जाकर लेकिन
मसला कुछ गड़बड़ा गया था
जब अपने इक खास दोस्त ने
घूर के देखा था
जितने भी राह में
पहचान के लोग मिले
सभी ने कुछ न कुछ
कॉमेंट मुझपे जड़े
फिर मैंने इक दोस्त से
पूछा
इस टोपी का है क्या मसला
उसने तुरंत कहा
भाई सिम्पल सी कहानी है
हर गांव में टोपी आज
राजनीती की निशानी है
आपने सिर पर इस पार्टी की पहनी है
जिसने घूर के देखा
वो दूसरी पार्टी का आदमी है
लाल रंग बी. जे. पी. का है
हरा रंग कांग्रेस का है
आप किस पार्टी के है
सबको आप का सिर कह रहा है
मैंने कहा
चलो दूसरा ही रंग खरीद के लायेंगे
उसने फटाक से कहा
भाई आप थर्ड मोर्चे के कहलायेंगे
याद रखना यहाँ नंगे सर ही चलना
किसी न किसी पार्टी के कहलाओगे वरना
मैंने झट से टोपी उतारी
और अपने बैग में रख ली
...................मिलाप सिंह भरमौरी
कविता का आगे का भाग अगली पोस्ट में भेजूंगा
हम शिकार हुए थे
पिछले महीने छुट्टी पर
जब हम अपने गांव गये थे
जाते- जाते अपने कल्चर से कुछ
ज्यादा ही प्यार आया था
अपने कबीले की टोपी
पहन के जायेंगे
मन में विचार आया था
दुकान पर जाके बढ़िया- सी
मैंने टोपी खरीदी थी
और बढ़े चाव के साथ
सिर पर पहनी थी
गांव में जाकर लेकिन
मसला कुछ गड़बड़ा गया था
जब अपने इक खास दोस्त ने
घूर के देखा था
जितने भी राह में
पहचान के लोग मिले
सभी ने कुछ न कुछ
कॉमेंट मुझपे जड़े
फिर मैंने इक दोस्त से
पूछा
इस टोपी का है क्या मसला
उसने तुरंत कहा
भाई सिम्पल सी कहानी है
हर गांव में टोपी आज
राजनीती की निशानी है
आपने सिर पर इस पार्टी की पहनी है
जिसने घूर के देखा
वो दूसरी पार्टी का आदमी है
लाल रंग बी. जे. पी. का है
हरा रंग कांग्रेस का है
आप किस पार्टी के है
सबको आप का सिर कह रहा है
मैंने कहा
चलो दूसरा ही रंग खरीद के लायेंगे
उसने फटाक से कहा
भाई आप थर्ड मोर्चे के कहलायेंगे
याद रखना यहाँ नंगे सर ही चलना
किसी न किसी पार्टी के कहलाओगे वरना
मैंने झट से टोपी उतारी
और अपने बैग में रख ली
...................मिलाप सिंह भरमौरी
कविता का आगे का भाग अगली पोस्ट में भेजूंगा
Friday, 1 November 2013
दीवाली के इस पवित्र -पावन
लक्ष्मण - जैसा हो भ्रातृ- प्रेम
हनुमान -जैसी हो सबमें भक्ति
सीता- जैसा सतीत्व सर्वत्र हो
मर्यादा पुरषोत्तम सी हो हर अभियक्ति
ज्ञान की ज्योति मन- मन चमके
घर- घर में हो माता लक्ष्मी
हो राम राज्य की कल्पना सार्थक
सब में हो मन वश करने की शक्ति
कोई विकार- अवसाद की ओर बढ़े न
हो दीवाली की लौ सी सांसारिक बस्ती
दीवाली के इस पवित्र -पावन त्यौहार की मेरी ओर से
सभी दोस्तों को हार्दिक सुभकामना
दीवाली का यह पवित्र त्यौहार आपके लिए सुबह और मंगलमय हो
..............मिलाप सिंह भरमौरी
हनुमान -जैसी हो सबमें भक्ति
सीता- जैसा सतीत्व सर्वत्र हो
मर्यादा पुरषोत्तम सी हो हर अभियक्ति
ज्ञान की ज्योति मन- मन चमके
घर- घर में हो माता लक्ष्मी
हो राम राज्य की कल्पना सार्थक
सब में हो मन वश करने की शक्ति
कोई विकार- अवसाद की ओर बढ़े न
हो दीवाली की लौ सी सांसारिक बस्ती
दीवाली के इस पवित्र -पावन त्यौहार की मेरी ओर से
सभी दोस्तों को हार्दिक सुभकामना
दीवाली का यह पवित्र त्यौहार आपके लिए सुबह और मंगलमय हो
..............मिलाप सिंह भरमौरी
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