Milap Singh Bharmouri

Milap Singh Bharmouri
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Sunday, 26 February 2017

Bhool ja kashmir ka sapna

भूल जा कश्मीर का सपना,,
अबके इस्लामाबाद में तिरंगा फहराऐगें।।

बंगला देश तो रख नहीं पाया
और अब कश्मीर की बात करता है
अरे ओ बडबोले पाकिस्तान
सचमुच मूर्ख और पागल लगता है।

धर्म के आधार पर बना था तू
लेकिन धार्मिक हो नहीं पाया
कितने ही मुस्लमानो का खून
वलोचिस्तान  में है तुमने  बहाया।

तब कहां गया था मजहब तेरा
जब बंगलादेश की सब्र की सीमा टूटी थी
तेरी इस लूच्ची बुजदिल सेना ने
लाखों मुस्लिम बेटियों की इज्जत लूटी थी

जब अपनी बंदूक निकाल के उसने
ढाका में भारत के चरणों में रख दी थी
तुम नियाजी से कब्र पर जाकर पूछो
कैसे उसने तेरी सारी इज्जत नंगी कर थी।

तेरे यहां कोई दीन धर्म की बात नहीं है
बस नफरत से पाकिस्तान चलता है
तशुदत और जुल्म के मेलजोल से
तुज जैसे देश का संबिधान बनता है।

थोडी सी भी तुझमे अगर अकल बची है
तो तू खुद आकर देख ले भारत में
प्यार से सब मजहब के लोग यहां
कैसे रहते है मिलजुल कर आपस में।
अरे भूल जा तू कश्मीर का सपना
वरना तेरी तकदीर के साथ धौखा होगा
अबके सीधा तिरंगा गढेगा इस्लामाबाद में
सोच न कि दोबारा कोई शिमला समझौता होगा ।

    
....... मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 21 May 2016

Dahej me car

दहेज में कार
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औकात नहीं है कौडी की
और दहेज में मांगे कार

अरे थोडा भूमि पर रह रे बंधू
जरा नियत अपनी सुधार

माना मिल भी गई गाडी भीख में
तो क्या होगा तेरा हाल

काम धंदा तो है नहीं कोई
फिर तेल के लिए मांगेगा उधार

घर क्या बनवा दिया बाप ने
तेरी तो आँखे छूने लगी आसमान

अरे इसे पेंट नहीं करवा पाएगा
जब पूज्य पिता जी जाएंगे स्वर्ग सिधार

.... मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 17 November 2015

रक्तदान

रक्तदान के महत्ब का
तब पता चलता है
जब कोई अपना
आई सी यू में जिंदगी के लिए
संघर्ष कर रहा होता है

जन्म देने वाली मां भी
अपने बच्चे को नही बचा सकती
उसके मुरझाते हुए चेहरे पर
मुस्कान नहीं ला सकती

लेकिन एक अनजान
कर के रक्त का दान
अनमोल जिंदगी को बचा लेता है
यमराज की दहलीज पर
पहुंच चुकी सांसो को
फिर से वापिस ले आता है

......मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 1 November 2015

होस्पीटल और मंदिर

मंदिर में भगवान
हमारी परोक्ष रूप से
सहायता करते हैं
और हम
पूरी श्रद्धा के साथ
दानपात्र को भरते हैं
और मंदिर के परिसर को
साफ सुथरा रखते हैं

होस्पीटल में डाक्टर
हमारी प्रत्यक्ष रूप से
सहायता करते हैं
जिनको रो चुके होते हैं परिजन
ऐसे शरीरों में भी
जान भरते हैं

और बदले में हम
क्या करते हैं
जगह जगह गंदगी फैला कर
शौचालय और परिसर को गंदा करते हैं
कब सुधरेगें हम
कब सुधरने की
खुद से ही पहल करेंगे हम

क्यों न मंदिर की तरह
सरकारी होस्पीटलों को भी
तन मन से पवित्र रखें हम
और क्यों न
मंदिरों की तरह
सरकारी होस्पीटलों में भी
दानपात्र रखें जाएं
और अपनी अपनी हैसियत से
होस्पीटलों में भी चढावा चढाएं
और प्रशासन
उस पैसे को
होस्पीटल के सुधार पर लगाए

    ...... मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 22 October 2015

राय बहादुर जोधामल जी

आज के जमाने में जब
लोग एक एक इंच जमीन के लडते हैं
लेकिन कुछ लोग
ऐसे भी हुए हैं
जो सैंकडो एकड भुमि दान करते थे

ऐसे ही एक दानी थे
राय बहादुर जोधामल जी
जिन्होने टांडा मैडिकल कोलेज कांगडा के लिए
बहुत सारी भुमि दान की थी

आज उनकी दान की हुई भुमि पर
एक सरकारी मैडिकल कोलेज है
जिसने हजारों मरीजों को
ठीक कर के नई जिंदगी दी है

आज उस महान समाज सेवक का
जन्म दिवस है
मेरा मन आज उनकी प्रतिमा के
नीचे सिर झुका कर तर है

  ........ मिलाप सिंह भरमौरी

( समाज सेवक स्व. राय बहादुर जोधामल जी को उनके ) जन्मदिवस पर हार्दिक बधाई !!!

Monday, 20 July 2015

Jharne

गिर रहा था
अमृत सा पानी यहाँ झरनों से
हमने दो हाथ जोड कर
झुक कर पी लिया ।

हो चुका था तार- तार
इमान खींच तानी में
हमने बैठ कर
चौरासी में खुद ही सी लिया ।

लोग जाते हैं स्वर्ग को
मरने के बाद सुना है
हमने स्वर्ग सा जीवन
यहाँ आकर जी लिया ।

------------- मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 19 July 2015

Kudarat ki kaya

ढूँढ रहे थे इधर उधर
जन्नत तो यहीं बसी है

इससे सुंदर कुदरत की काया
शायद ओर कहीं नहीं है

यही तो है वादिए भरमौर
यही तो है वादिए भरमौर।।

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Mehsus hua kuch

महसूस यूँ हुआ कुछ
आकर अपने गांव में
जैसे गोदी में भर लिया हो
प्यार से मां ने ।

इसकी मिट्टी के कण-कण से
मेरा रिश्ता गहरा  है
सारा शरीर रोम- रोम
इससे ही तो बना है ।

फक्र होता है
इसकी आबोहवा से
जिससे मेरी जीव संरचना बनी है
रक्त दिया है मेरी रग- रग को इसने
और मुझको सांसे दी है ।

   ----- मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 24 March 2015

Aag ugalti garmi

इस आग उगलती गर्मी से
कुछ दिन राहत पा आते हैं
लेकर के कुछ छुट्टियां
ठंडी भरमौर की वादियों में जा आते हैं

टेक आते हैं चौरासी में माथा
कुगती में कार्तिकेय के दर्शन पा आते हैं
बहुत प्रसिद्ध है मणिमहेश यात्रा
भोले के दर सिर झुका आते हैं

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 20 March 2015

पगला बन

भीतर चला द्वंद्व
बाहर चले श्लोक।

इह लोक में फंसे हुए को
मिले कैसे परलोक।

जीना है तो अंदर की सुन ले
थोडा सा तू पगला बन ले।

देख के अपनी बर्बादी को भी
खींच के तू ताली ठोक।

---- मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 8 December 2014

तेरी बहन

जब कोई तेरी बहन को छेडे
या बुरी नजर से देखे
आग लग जाती है सीने में
खून बहने लगता है पसीने में

कब तू सब्र कर पाता है
दो चार उसी वक्त जड देता है
कितनी नफरत हो जाती है पैदा
कुछ नहीं दिखता उसमें इंसान जैसा

पर तू जब खुद मन में लिए दुर्बुध
किसी की बहन को छेडता है
या बुरी नजर से देखता है
हवस भरे मन से
उसके घर या रास्ते की तरफ बढता है

तो तेरी अक्ल कहां खो जाती है
वो सब इंसानियत कहां खो जाती है
जब तू लौटता है व्यभिचार करके
दूसरे के घर में जहर भरके

क्यों नहीं तेरा मन करता मर जाने को
जहर निगल लेने को
फंदे से लटक जाने को
बडे फक्र से अपनी नीचता
अपने दोस्तों को सुनाता है
किसी इज्जत की निलामी को
गली गली तक पहुंचाता है

सुन तू तो दोषी है ही
तेरी यह बातें सुने वाले भी
दोषी ठहराऐ जाएंगे
तुझको फैंका जाएगा
उफनते तेल के कडाहे में
उनके कानों में भी
उफनता तेल डाला जाएगा

उसके घर में देर हो सकती है
मगर अंधेर नहीं होता
मैं महसूस कर रहा हूं
अभी से तुमको रोता

अभी भी संभल जा कुछ भला हो जाएगा
तू भी पाप से बच जाएगा
उसका भी घर बच जाएगा

मैं नहीं कहता सब तेरी ही गलती होगी
हो सकता है वो भी तुझे फोन करती होगी
पर राह गलत है मंजिल भी गलत ही होगी
जो जो करेगा पाप वही बनेगा भोगी

      ------ मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 29 November 2014

Sharaab pite hai


शराब पीते हैं और झूमते हैं गाते हैं
इस तरह हम अपने गम छुपाते हैं
कोई पूछे जो सबब हमसे पीने का
बेबफा को याद करते हैं मुस्कुराते हैं

    ------ मिलाप सिंह भरमौरी

Good morning shayari


घोंसलों से निकल के पंछियों ने
छेडा है सुंदर राग

सुबह हो गई है जग
उठ बिस्तर से तू अब जाग

बुला रही है कर्म भूमि तुझे
कर सुर्यवंदना से मन विस्तार

कदम बढा तू है भारत का वासी
कर ले पूर्ण अपने तू सब काज

----- मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 16 October 2014

बेचारा मुशर्रफ !

पता नहीं कब पड जाए
गले में उसके फंदा
राजद्रोह का घोर
उस पर चल रहा मुकदमा

क्या करे बेचारा
संविधान तो देगा उसे झुला
इसलिए कश्मीर कश्मीर अलाप के
आतंकवादियो को रहा रिझा

इसकी बात का बुरा न मानना भाइयो
ऐसी परिस्थिति में
ऐसी ही हालत हो जाती है
सही गलत कहां पता चलता है
बुद्धि अक्सर खो जाती है

------- मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 11 October 2014

गम के आंसुओं को


गम के आंसुओं को हम पी न सकेगें
दिल के टुकडों को हम सी न सकेगें
जाते हुए को पीछे से रोकना नहीं अच्छा
पर जाने के बाद आपके हम जी न सकेगें

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 10 October 2014

करवाचौथ मुबारक


करवाचौथ की रात शीतल प्यारी
पूरे करना सबके सपने सुनहरी

तू चांद में उनका चेहरा दिखाना
सीमा पर हैं जिनके पति प्रहरी

सुन मन मुटाव तू सबके मिटाना
करना प्रेम भावना ओर भी गहरी

सदा सुहागन का उनको वर देना
भूखी प्यासी हैं जो तेरे दिनभर ठहरी

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 8 October 2014

Aar paar ki


छोड के रोज की ठक ठक ठक ठक
बस एक बार की हो जाए
बहुत हो गई छिटपुट छिटपुट
अब आर पार की हो जाए

बहुत कठिन है पलायन करना
बेवजह ही पल पल मरना
उनके लहजे में उनकी ही भाषा में
अब खार खार सी हो जाए

बहुत हो गई हाथ मिलाई
गले से मिलना भी बहुत हुआ
काफिर के इन रिश्तों से
अब तार तार की हो जाए

बहुत दिनों तक जुदा रह लिए
अपने वतन के लोगों से
पाक से पोक की धरती को
भारत से मिलाव की हो जाए

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 24 September 2014

सुपरपावर


अब इसमें नहीं दो राय कोई
अंतरिक्ष में कौन है सुपरपावर
भारत का ही सिक्का चलने वाला है
हो जमीन आकाश या फिर सागर

तू भारत का निवासी है
नहीं दुनिया में है कोई तेरे बराबर
भुजाओं में तेरी है श्रम की फडक
सिने में है तेरे हिम्मत का सागर

अदभुत है तेरी सहनशीलता
बडा अनोखा है भाईचारा नागर
तू विश्वगुरु था आगे भी रहेगा
ज्ञान मांगेगा यहां फिर विश्व आकर

------- मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 8 September 2014

Yadon ki khoosbu


तेरी यादों की खुशबू
दिल को मेरे महका जाती है

देखो किस्मत प्यार की वर्षा
बिन बादल भी बरसा जाती है

बेशक तेरी आस नहीं है
तू मेरे अब पास नहीं है

पर कभी कभी शाम को हिचकी
एहसास तेरा दिला जाती है

- - - - - - मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 30 August 2014

दिल मत सोच


Hindi shayari
@ @ @ @ @ @ @

दिल तू  मत सोच  उसके बारे में
वो  नहीं है  मुक्कदर  तुम्हारे  में ।
अपने मन को भी कर तू काबू में
और न न कर हर  बार इशारे में।

------ मिलाप सिंह भरमौरी