Milap Singh Bharmouri

Milap Singh Bharmouri

Tuesday, 30 April 2019

मजदूर दिवस

ऐ मजदूर! नमन तुझे

नमन है तेरी माटी को


झेल रहा है सदियों से


पोषितों की बनाई परिपाटी को।

न जमीन का तू मालिक है


न कर्ज तुम्हें मिलता है


न माफ् होता कर्जा तेरा


फिर भी आत्महत्या नहीं करता है

ऐ मजदूर! नमन तुझे


हर गली चौराहे पर मिलता है


काम मिलने की आशा से


चेहरा तेरा खिलता है


धूप में रिक्शा खींचता है


धरती को पसीने से सींचता है।

ऐ मजदूर!


तू ही बनाता है महलों को


अमीरों को उसमें रहने को


तेरे ही सिर से होकर आते


सब ईंट पत्थर सीमेंट के बोरे


पर महल के बन जाते ही


कोई ओर आकर नारियल तोड़े।

ऐ मजदूर!


तू झेलता शोषण ठेकेदारों का


हर माह जो चट कर जाते


मेहनताना तेरा हज़ारों का


जो दस्खत करवाता एक्ट की दिहाड़ी


और देता केबल फूटी कौड़ी।

ऐ मजदूर नमन तुझे।


..….. मिलाप सिंह भरमौरी।


Tuesday, 15 January 2019

धुँध

यह धुँध घोर छछुंदर है
सूरज को रोकने उठती है
फैल के कुछ पल चारों ओर
जोर - जोर से हँसती है।

रोक लिया सूरज को मैंने
देखो सारे जग वालो
आज से मेरा है धरती - अंबर
उजाले की स्मृति मिटा डालो।

लेकिन सच कब मिटता है
झूठ का पर्दा उठ जाता है
तोड़ कुहासे का फाहा - फाहा
सूरज फिर से निकल आता है।

....... मिलाप सिंह भरमौरी

शुभ प्रभात दोस्तों.....

Monday, 26 November 2018

गंवार समाज

अभी भी गंवार है समाज

बेटियां हैं जिनकी उन्हें सताता है।


दो तीन बेटियां होने के बाद भी


बेटा पैदा करने का प्रेशर बनाता है।

दोस्त करते हैं बात बात में टिंचरे


भाई अगली बार कब 


फिर से मिठाई खिला रहे हो।


कब हमें तुम अपने बेटे का ताऊ बना रहे हो।

कम नहीं होती हैं पत्नियां भी


वो भी कोई कसर नहीं छोड़ती हैं।


कचर पचर कचर पचर कानों में


पता नहीं क्या क्या इस बारे में बोलती हैं।

एक ओर वो धर्म के ठेकेदार


क्या क्या सिखाते रहते हैं।


खुद को तो श्लोक पढ़ने नहीं आते सही से


ओर हमें बेटा पैदा करने के मंत्र बताते हैं।

और क्या कहना घर के बुजुर्गों का भी


कभी अप्रत्यक्ष रूप से समझाते हैं।


असफल हो जाता है जब यह प्रयास


तो  प्रत्यक्ष रूप से बेदखली का डर दिखाते हैं।

अभी भी गंवार है समाज

बेटियां हैं जिनकी उन्हें सताता है।


दो तीन बेटियां होने के बाद भी

बेटा पैदा करने का प्रेशर बनाता है।

      ......... मिलाप सिंह भरमौरी 

Thursday, 4 October 2018

Diwali

आने वाली दिवाली है
इक मुहिम सी चलने वाली है
पटाखे हटाओ
हमें प्रदूषण से बचाओ।

बुरी नहीं है बात
सौ फीसद सच ही कहते हैं
चलते हुए पटाखे
प्रदूषण पैदा करते हैं।

पर यह बात बुरी
तब बन जाती है
जब सामने से
उपदेशक की ए सी गाड़ी आती है।

दिन रात चलते हैं
उसके घर दो तीन ए सी
जो बना फिरता है
ग्लोबल वार्मिंग का उपदेशी।

उसकी करनी और कथनी में
फर्क नजर आता है
पेशाब करने के लिए भी
वह मोटरसाइकिल से जाता है।

छोड़ो उसकी बात
उसकी बातों में न आऊंगा
साइकिल चलाता हूँ प्रकृति की खातिर
तो दिवाली भी मिट्टी के दीयों से ही मनाऊँगा।

......मिलाप सिंह भरमौरी

पेट्रोल



न चलाई है मोटरसाइकिल

और न चलाएंगे कभी

कोई फर्क नहीं पड़ता अगर

पेट्रोल 200 रुपये लीटर भी हो जाए अभी

सस्ती मिल रही हैं सब्जियां

सस्ता मिल रहा है अनाज

दो चार किलोमीटर के लिए तो

भाई अपनी ट्यूबलेस साइकिल जिंदाबाद

न कोई पंचर न कोई खटपट

उतर गई चेन तो लगा ली झटपट

सस्ता है बसों का किराया

बड़ी मस्त लगती है ट्रेनों की खटखट।

कोई फर्क नहीं पड़ेगा भाई अगर

आप मोटर गाड़ी न चलाएंगे 

फायदे ही हैं इससे बहुत

प्रकृति को प्रदूषण से बचा पाएंगे।

आज से तुम मानवता के लिए 

यह उपकार करो

साइकिल को उठाओ चलाने के लिए

पेट्रोल डीजल से चलने वाली

गाड़ियों का बहिष्कार करो।

........मिलाप सिंह भरमौरी 

Thursday, 27 September 2018

दिवाली



आने वाली दिवाली है

इक मुहिम सी चलने वाली है

पटाखे हटाओ

हमें प्रदूषण से बचाओ।

बुरी नहीं है बात

सौ फीसद सच ही कहते हैं

चलते हुए पटाखे

प्रदूषण पैदा करते हैं।

पर यह बात बुरी

तब बन जाती है

जब सामने से 

उपदेशक की ए सी गाड़ी आती है।

दिन रात चलते हैं

उसके घर दो तीन ए सी

जो बना फिरता है

ग्लोबल वार्मिंग का उपदेशी।

उसकी करनी और कथनी में

फर्क नजर आता है

पेशाब करने के लिए भी

वह मोटरसाइकिल से जाता है।

छोड़ो उसकी बात

उसकी बातों में न आऊंगा

साइकिल चलाता हूँ प्रकृति की खातिर

तो दिवाली भी मिट्टी के दीयों से ही मनाऊँगा।

 ......मिलाप सिंह भरमौरी






Monday, 25 June 2018

Karj mafi

कर्ज माफ़ी
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टीस उठती जरूर सीने में
मगर दर्द इतना भी ज्यादा न होता।

लड लेता परेशानियों से अपनी
खुदकुशी का इरादा न होता।

मेहनती किसान था बहुत वह
शायद अब तक भर भी देता कर्ज सारा ।

अगर कर्ज माफी का कमबख्त झूठा
यह जानलेवा वादा न होता।

      ------- मिलाप सिंह भरमौरी