milap singh

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Thursday, 21 November 2013

बापू आशा राम अमर हो गये है

बापू  आशा राम
 अमर  हो गये है
मुझको तो कुछ ऐसा लगता है
पर्याय बन चूका है उसका नाम
आते जाते हर कोई उसकी बातें करता है

उसके बारे जो आज मैंने सुना है
आपको भी बतलाता हूँ
उसकी महिमा को
व्याख्या सहित सुनाता हूँ

जब आज दोपहर मै
कलोनी से गुजर रहा था
तो चार पांच  औरतों में
कुछ खुसर पुसर चल रहा था
जब कान  के पर्दों  को मैंने
थोडा उधर झुकाया
तो उधर से मैंने यह
रहस्य पाया

इस रेल की  नौकरी की  टैंशन ने
हमारे  मर्दों  को
पच्चास की  उम्र में ही फेल   कर   दिया है
और उधर देखो
बापू आशा राम
पच्चहतर की  उम्र में भी पास हो गया है

उसी वक्त हाल्ट  से
लोकल ने हार्न बजाया
मैंने जल्दी जल्दी
स्टेशन की  ओर  कदम बढ़ाया
जब गाड़ी में बैठा तो
वहाँ पर भी कुछ
कॉलेज के लड़के बैठे थे
आपस में वो तरह तरह की
बातें कर  रहे थे

उनमे से एक को  बार बार
फोन आ रहे थे
शायद गर्ल फ्रेंड का होगा
उनमे से एक बोला
पहले हम तो सोचते  थे तू भी
हमारी तरह अकेला है
पर आज फोन से लग रहा है
तू तो असली बापू आशा राम का चेला है

फिर नाईट ड्यूटी में भी मैंने
कुछ शव्द सुने थे
रिटायरमेंट पर बैठे
कुछ इम्प्लॉई  इकठ्ठे काम  कर   रहे थे

मजाक- मजाक में एक बोला
अरे इतनी रत हो गई
तू अभी घर नही गया
उसने भी उत्तर में कहा
अरे भाई ! अब पहले वाला जोश नही रहा
दूसरा झट से बोला
क्या बात करता है भाई
बापू आशा राम को देखो
उसका चेला बन जा सांई

इतनी बातें सुनते ही
मेरे अंतर्मन ने कहा
मिलाप यह बापू आशा राम
लोकोक्ति है या मुहावरा



...........मिलाप सिंह भरमौरी



1 comment:

  1. खूब कोसो .अब इसी लायक जो है

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