Milap Singh Bharmouri

Milap Singh Bharmouri

Monday, 20 July 2015

Jharne

गिर रहा था
अमृत सा पानी यहाँ झरनों से
हमने दो हाथ जोड कर
झुक कर पी लिया ।

हो चुका था तार- तार
इमान खींच तानी में
हमने बैठ कर
चौरासी में खुद ही सी लिया ।

लोग जाते हैं स्वर्ग को
मरने के बाद सुना है
हमने स्वर्ग सा जीवन
यहाँ आकर जी लिया ।

------------- मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 19 July 2015

Kudarat ki kaya

ढूँढ रहे थे इधर उधर
जन्नत तो यहीं बसी है

इससे सुंदर कुदरत की काया
शायद ओर कहीं नहीं है

यही तो है वादिए भरमौर
यही तो है वादिए भरमौर।।

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Mehsus hua kuch

महसूस यूँ हुआ कुछ
आकर अपने गांव में
जैसे गोदी में भर लिया हो
प्यार से मां ने ।

इसकी मिट्टी के कण-कण से
मेरा रिश्ता गहरा  है
सारा शरीर रोम- रोम
इससे ही तो बना है ।

फक्र होता है
इसकी आबोहवा से
जिससे मेरी जीव संरचना बनी है
रक्त दिया है मेरी रग- रग को इसने
और मुझको सांसे दी है ।

   ----- मिलाप सिंह भरमौरी

Tuesday, 24 March 2015

Aag ugalti garmi

इस आग उगलती गर्मी से
कुछ दिन राहत पा आते हैं
लेकर के कुछ छुट्टियां
ठंडी भरमौर की वादियों में जा आते हैं

टेक आते हैं चौरासी में माथा
कुगती में कार्तिकेय के दर्शन पा आते हैं
बहुत प्रसिद्ध है मणिमहेश यात्रा
भोले के दर सिर झुका आते हैं

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 20 March 2015

पगला बन

भीतर चला द्वंद्व
बाहर चले श्लोक।

इह लोक में फंसे हुए को
मिले कैसे परलोक।

जीना है तो अंदर की सुन ले
थोडा सा तू पगला बन ले।

देख के अपनी बर्बादी को भी
खींच के तू ताली ठोक।

---- मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 18 March 2015

सोनोग्राफी

जल जाने से अच्छा है
सड जाना ।
उससे भी अच्छा है
जंगली जानवरों का
निवाला बन जाना ।

किसी का तो पेट भरेगा
तृप्त हो जाएगा रूह तक ।
चाव से चवाएगा हड्डियाँ
अगले दो पैरों से पकडकर ।

चलो किसी के काम तो आएगा
यह मृत निश्चल शरीर ।
क्यों रहता है मानव तू
अंतकर्म के लिए अधीर ।

इक अदृश्य क्रिया के कारण
क्या क्या करता फिरता मानव ।
रख कल गिरवी इंसानियत को
बन जाता है पूरे का पूरा दानव ।

---- मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 1 March 2015

Barish

रोक रखा है मुझे
यह जाने नहीं देती

रोक रखा है मुझे
यह जाने नहीं देती ।

इस बारिश की जिद्द पे
किसका जोर चलता है ।

----- मिलाप सिंह भरमौरी