Milap Singh Bharmouri

Milap Singh Bharmouri
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Monday, 20 July 2015

Jharne

गिर रहा था
अमृत सा पानी यहाँ झरनों से
हमने दो हाथ जोड कर
झुक कर पी लिया ।

हो चुका था तार- तार
इमान खींच तानी में
हमने बैठ कर
चौरासी में खुद ही सी लिया ।

लोग जाते हैं स्वर्ग को
मरने के बाद सुना है
हमने स्वर्ग सा जीवन
यहाँ आकर जी लिया ।

------------- मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 20 March 2015

पगला बन

भीतर चला द्वंद्व
बाहर चले श्लोक।

इह लोक में फंसे हुए को
मिले कैसे परलोक।

जीना है तो अंदर की सुन ले
थोडा सा तू पगला बन ले।

देख के अपनी बर्बादी को भी
खींच के तू ताली ठोक।

---- मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 29 November 2014

Sharaab pite hai


शराब पीते हैं और झूमते हैं गाते हैं
इस तरह हम अपने गम छुपाते हैं
कोई पूछे जो सबब हमसे पीने का
बेबफा को याद करते हैं मुस्कुराते हैं

    ------ मिलाप सिंह भरमौरी

Good morning shayari


घोंसलों से निकल के पंछियों ने
छेडा है सुंदर राग

सुबह हो गई है जग
उठ बिस्तर से तू अब जाग

बुला रही है कर्म भूमि तुझे
कर सुर्यवंदना से मन विस्तार

कदम बढा तू है भारत का वासी
कर ले पूर्ण अपने तू सब काज

----- मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 11 October 2014

गम के आंसुओं को


गम के आंसुओं को हम पी न सकेगें
दिल के टुकडों को हम सी न सकेगें
जाते हुए को पीछे से रोकना नहीं अच्छा
पर जाने के बाद आपके हम जी न सकेगें

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Friday, 10 October 2014

करवाचौथ मुबारक


करवाचौथ की रात शीतल प्यारी
पूरे करना सबके सपने सुनहरी

तू चांद में उनका चेहरा दिखाना
सीमा पर हैं जिनके पति प्रहरी

सुन मन मुटाव तू सबके मिटाना
करना प्रेम भावना ओर भी गहरी

सदा सुहागन का उनको वर देना
भूखी प्यासी हैं जो तेरे दिनभर ठहरी

-------- मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 8 September 2014

Yadon ki khoosbu


तेरी यादों की खुशबू
दिल को मेरे महका जाती है

देखो किस्मत प्यार की वर्षा
बिन बादल भी बरसा जाती है

बेशक तेरी आस नहीं है
तू मेरे अब पास नहीं है

पर कभी कभी शाम को हिचकी
एहसास तेरा दिला जाती है

- - - - - - मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 4 August 2014

Hava ka jhounka

कुछ खास खुशबू है हवा के झौंके में
छत पर  बैठे मैंने आज महसूस किया है  
लगता है तेरे गालों को छुआ है इसने    
तू भी ठहलती है छत पे रोज मैंने सुना है

----------- मिलाप सिंह भरमौरी

Saturday, 2 August 2014

कितना असर

जन्नत सी लगने लगती है यह दुनिया
जब भी  सोचता हूँ मैं तुम्हारे बारे में

जुबान पर आ जाता है अचानक कई बार
पता नहीं क्या रखा है नाम तुम्हारे में

कितना असर होगा तेरी मौहब्बत में
सोचता हूँ तन्हा बैठकर मैं फुर्सत में

गर कबूल कर लो दोस्ती मेरी तुम तो
रौशनी हो जाए ओर ज्यादा मेरे सितारे में

      -------- मिलाप सिंह भरमौरी

Pyar me


Hindi shayari

अजीब आकर्षण होता है
इस प्यार में

नाम लिखते फिरते हैं
दरख्तों और दिवार में

घंटों पहले खडे हो जाते हैं
राह में आकर

क्या पता क्या दिखता है
उन्हें दिलदार में

---- मिलाप सिंह भरमौरी