Milap Singh Bharmouri

Milap Singh Bharmouri

Sunday, 1 November 2015

होस्पीटल और मंदिर

मंदिर में भगवान
हमारी परोक्ष रूप से
सहायता करते हैं
और हम
पूरी श्रद्धा के साथ
दानपात्र को भरते हैं
और मंदिर के परिसर को
साफ सुथरा रखते हैं

होस्पीटल में डाक्टर
हमारी प्रत्यक्ष रूप से
सहायता करते हैं
जिनको रो चुके होते हैं परिजन
ऐसे शरीरों में भी
जान भरते हैं

और बदले में हम
क्या करते हैं
जगह जगह गंदगी फैला कर
शौचालय और परिसर को गंदा करते हैं
कब सुधरेगें हम
कब सुधरने की
खुद से ही पहल करेंगे हम

क्यों न मंदिर की तरह
सरकारी होस्पीटलों को भी
तन मन से पवित्र रखें हम
और क्यों न
मंदिरों की तरह
सरकारी होस्पीटलों में भी
दानपात्र रखें जाएं
और अपनी अपनी हैसियत से
होस्पीटलों में भी चढावा चढाएं
और प्रशासन
उस पैसे को
होस्पीटल के सुधार पर लगाए

    ...... मिलाप सिंह भरमौरी

Thursday, 22 October 2015

राय बहादुर जोधामल जी

आज के जमाने में जब
लोग एक एक इंच जमीन के लडते हैं
लेकिन कुछ लोग
ऐसे भी हुए हैं
जो सैंकडो एकड भुमि दान करते थे

ऐसे ही एक दानी थे
राय बहादुर जोधामल जी
जिन्होने टांडा मैडिकल कोलेज कांगडा के लिए
बहुत सारी भुमि दान की थी

आज उनकी दान की हुई भुमि पर
एक सरकारी मैडिकल कोलेज है
जिसने हजारों मरीजों को
ठीक कर के नई जिंदगी दी है

आज उस महान समाज सेवक का
जन्म दिवस है
मेरा मन आज उनकी प्रतिमा के
नीचे सिर झुका कर तर है

  ........ मिलाप सिंह भरमौरी

( समाज सेवक स्व. राय बहादुर जोधामल जी को उनके ) जन्मदिवस पर हार्दिक बधाई !!!

Thursday, 23 July 2015

चौरासी में

बैठा हूँ चौरासी में
भोले के मंदिर के आगे।
तांबे के नंदी के पास
तख्ती से पीठ लगा के।

----- मिलाप सिंह भरमौरी

Wednesday, 22 July 2015

Kugti village

पानी बहने की
आवाज सुनाई देती है
गाडिय़ों का यहाँ
कोई शोर नहीं है।

शुद्ध हवा के झोंके
सरसराते हैं यहाँ
दम घोटता धुआँ
किसी ओर नहीं है।

न शराब का ठेका
न घरेलू मिलती है यहाँ
कुगती की तरह सुंदर
कोई गांव नहीं है।

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Monday, 20 July 2015

Jharne

गिर रहा था
अमृत सा पानी यहाँ झरनों से
हमने दो हाथ जोड कर
झुक कर पी लिया ।

हो चुका था तार- तार
इमान खींच तानी में
हमने बैठ कर
चौरासी में खुद ही सी लिया ।

लोग जाते हैं स्वर्ग को
मरने के बाद सुना है
हमने स्वर्ग सा जीवन
यहाँ आकर जी लिया ।

------------- मिलाप सिंह भरमौरी

Sunday, 19 July 2015

Kudarat ki kaya

ढूँढ रहे थे इधर उधर
जन्नत तो यहीं बसी है

इससे सुंदर कुदरत की काया
शायद ओर कहीं नहीं है

यही तो है वादिए भरमौर
यही तो है वादिए भरमौर।।

------ मिलाप सिंह भरमौरी

Mehsus hua kuch

महसूस यूँ हुआ कुछ
आकर अपने गांव में
जैसे गोदी में भर लिया हो
प्यार से मां ने ।

इसकी मिट्टी के कण-कण से
मेरा रिश्ता गहरा  है
सारा शरीर रोम- रोम
इससे ही तो बना है ।

फक्र होता है
इसकी आबोहवा से
जिससे मेरी जीव संरचना बनी है
रक्त दिया है मेरी रग- रग को इसने
और मुझको सांसे दी है ।

   ----- मिलाप सिंह भरमौरी